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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 73

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, verse 73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 73

संस्कृत श्लोक

विविधविषयवासनानुवृत्त्या खदिरकरञ्जकरालकोटरासु । जगति जठरयोनिषु प्रयातो गहनतरासु च काननस्थलीषु ॥ ७३ ॥

हिन्दी अर्थ

मुने, वह जिस जगत में विविध विषयों की वासना ओं के अनुवर्तन से खैर और करोदे के कोटो से भीषण पर्वत की गुफाओं के तुल्यविभिन्न गर्भाशयों में तथा घनी लता और झाड़ियों से अत्यन्त व्याप्त वनस्थलियों मेँ भी भटका