Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
स उपेत्य महाबाहो कुपितं तं महामुनिम् ।
कल्पक्षुब्धाब्धिगम्भीरं सान्त्वपूर्वमुवाच ह ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महावाहो श्रीरामचन्द्रजी, वह काल कुपित हुए भूगुजी के पास आकर प्रलयकाल में
क्षुब्ध हुए समुद्र के तुल्य गंभीर स्वरसे शान्तिपूर्वक उनसे बोला