Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यत्परश्वसनापास्तशिखरा मेदिनीभृतः ।
दोलामिव समारूढाश्चेलुः पेतुश्च घूर्णिताः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके तेज श्वासवायु से छिन्न-भिन्न शिखरवाले हुए पर्वत झूले
में बैठे हुएकी तरह इधर-उधर झूलते और चक्कर काटकर गिर पड़ते थे