Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
किंचिद्भूतमयोऽस्मीति स्थितं शून्यमभूतकम् ।
गृह्यमाणोऽप्यसद्रूपो निशाचर इवास्थितम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्य जगत में उक्त न्यायको आध्यात्मिक जगत में भी दिखाते हुए कहते है ।
मैं किंचित् भूतमय हूँ, इस प्रकार शून्य ओर भौतिकरूप से स्थित, ग्रहण किया जाता हुआ भी
असत् निशाचर के तुल्य यह जगद्रूप चित्र स्थित नहीं हे