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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 32

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

यदङ्गानि विशीर्णानि गतान्यन्तर्धिमग्रतः । तच्चित्तेन विनार्थाशा शाम्यतीति प्रदर्शितम् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

छिन्न- भिन्न हुए अंग मेरे सामने अन्तर्हित हो गये, ऐसा जो मैंने कहा उससे चित्त के बिना अर्थसहित आशा शान्त हो जाती है, यह दर्शाया हे । भाव यह कि मन का बाध होने पर विषयों के साथ विषयों की आशा भी निवृत्त हो जाती है, यह दर्शाया है