Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
आकाशचित्ताकाशाद्याश्चिदाकाशकलङ्कितात् ।
प्रसूता दावदहनाद्यथा मरुमरीचयः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
मरूभूमि में निपतित वनाग्निसदृश सूर्य के ताप से मृगतृष्णाकी (मरूभूमि में मिथ्या जलप्रवाह
की) भ्रमवश जज्ञों की दृष्टि में उत्पत्ति होती है वैसे ही अविद्याकलंकसे युक्त चिदाकाश से
भूताकाश, चित्ताकाश आदि उत्पन्न हुए हैं