Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
आकाशचित्ताकाशौ द्वौ चिदाकाशबलोद्भवौ ।
चित्कारणं हि सर्वस्य कार्यौघस्य दिनं यथा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाश सन्निधानमात्र से उनका (चित्ताकाश ओर भूताकाशका) निमित्त है, ऐसा
दिखलातेहै।
४ यद्यपि श्रीवसिष्ठजी ने पीछे बारह प्रकार की जीवजातियाँ कही हैं, तथापि उनका सात्विक,
राजस ओर तामस रूप त्रिविधता में अन्तभवि मानकर यहाँ तीन प्रकार की जीवजातियाँ कही हैँ ।
भूताकाश और चित्ताकाश-ये दोनों चिदाकाश के बल से उत्पन्न हुए हैं जैसे दिन अपने
संनिधानमात्र से विविध कार्योका कारण हे, वैसे ही चिदंश भी संनिधानमात्र से सबका
कारण है