Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
यदैव खलु शुद्धाया मनागपि हि संविदः ।
जडेव शक्तिरुदिता तदा वैचित्र्यमागतम् ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
तकों के स्थिर न होने से उनको सदा संशय ही होगा, व्यवस्थित एक पक्षका निर्णयभेद
कैसे होगा ? इस पर कहते हैं।
जभी शुद्ध चित् में तनिक भी जड़शक्ति उदित होती है तभी वैचित्र्य प्राप्त होता है,
भाव यह कि अपनी-अपनी कल्पना से कल्पित तर्कमें श्रद्धाजाड्य होने से उसमें वैचित्र्य
होता हे