Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
चित्राधिकारवशतो विचित्रा विकृताभिधाः ।
यथा याति नरः कर्मवशाद्याति तथा मनः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे एक ही मनुष्य रसोई बनाने से पाचक, पढ़ाने से पाठक, गाँवका प्रधान
होने से मुखिया यों विलक्षण अधिकारों के कारण विचित्र ओर विकृत (तत्-तत् कार्य का
प्रकाश करनेवाले) नामों को प्राप्त होता है वैसे ही मन भी कर्मवश उक्त नामों को प्राप्त होता
है