Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
मनः किं स्याज्जडं ब्रह्मंस्तथा वापि च चेतनम् ।
इत्येको मम तत्त्वज्ञ निश्चयोऽन्तर्न जायते ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
वह जीव कहा जाता है, इस कथन से मने चेतनताकी प्राप्ति होने से अन्य दर्शने ओर
लोकमें भी उसकी जडता की प्रसिद्धि होने से सन्देहरमे पड रहे श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं ।
ब्रह्मन्, मन क्या जड़ है अथवा चेतन है ? हे तत्त्वज्ञ, इस प्रकार का मेरे मनमें एक निश्चय
नहीं होता हे