Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
चितेश्चेत्यानुपातिन्या गतायाः सकलङ्कताम् ।
प्रस्फुरद्रूपधर्मिण्या एताः पर्यायवृत्तयः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
संसार
और उसकी बीजरूपता को प्राप्त हुआ वह शुद्ध चेतन दर्शन, श्रवण, स्पर्श, रसन, प्राण आदि
क्रियाओं के करने से लोकमें क्रिया नाम को प्राप्त होता है ॥ ३ ०॥ अविद्यावश कलंकयुक्त हुई
अतएव बाह्य कल्पना के उन्मुख वस्तुतः प्रकाशस्वरूप चिति के ये मन आदि पर्याय (नामान्तर)
हँ