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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

काकतालीययोगेन त्यक्तस्फारदृगाकृतेः । चितेश्चेत्यानुपातिन्याः कृताः पर्यायवृत्तयः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

अकस्मात्‌ अपने स्वरूप का विस्मरण होने से जिसे अपने अपरिच्छिन्न दृष्टापन का (चिदेकरसता का) अनुभव नहीं हो रहा हे, अतएव बाह्य कल्पना में उन्मुख चिति के ये सब नामान्तर किये गये हैं