Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
मनो यदनुसंधत्ते तत्कर्मेन्द्रियवृत्तयः ।
सर्वाः संपादयन्त्येतास्तस्मात्कर्म मनः स्मृतम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि कर्म कर्मेन्धियो का वृक्तिरूप है, वह मनसे कैसे हो सकता है ? तो इस
पर कहते हैं।
मन जिसका अनुसन्धान करता है, उसीका सम्पूर्ण कर्मेन्द्रियवृत्तियाँ सम्पादन करती है,
इसलिए कर्म मन कहा गया है