Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 95 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अप्रबुद्धजनाचारो यत्र राघव दृश्यते ।
तत्र ब्रह्मण उत्पन्ना जीवा इत्युक्तयः स्थिताः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव यह सृष्टिवाद अज्ञानी के संमत व्यवहारभरूमि में ही है, परमार्थपद में नहीं है
ऐसा कहते हैं ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, जहाँ पर अज्ञानी लोगों का व्यवहार देखा जाता है, वहींपर जीव ब्रह्म से
उत्पन्न हुए हैं, ऐसी उक्तियाँ स्थित हैं