Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 95 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
साधु राघव पृष्टोऽस्मि त्वया प्रश्नमिमं शुभम् ।
शृणु वक्ष्यामि ते येन भृशं ज्ञानोदयो भवेत् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार रामचन्द्रजीके आक्षेप करने पर प्रामाणिक आक्षेप की प्रशंसा करते हुए उसके
समाधान की प्रतिज्ञा करते हैं ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, मुझसे आपने जो यह सुन्दर प्रश्न किया, यह बहुत
ही अच्छा किया । सुनिए, मैं आपसे कहता हूँ, जिससे अवश्य ज्ञान का उदय होगा