Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तज्ज्ञैस्तामससत्त्वेति तादृशारम्भशालिनी ।
भवैः कतिपयैर्मोक्षभागिनी चेत्तदुच्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
दानव, राक्षस, पिशाच आदि जन्म में सतत्वगुणकी अभिवृद्धि होने से प्रह्माद, कर्कटी आदिकी
ज्ञानप्राप्ति प्रसिद्ध है, यह भाव है राजसतामसी पहले कही जा चुकी है, उसके कार्य के
हेरफेर से तेरहवीं जीवजाति को कहते हैं ।
यदि रजोगुण-तमोगुण प्रचुर फलों से युक्त कुछ जन्मों के बाद ही मोक्षभागिनी उत्पत्ति
हो, तो ऐसा होने पर वह रजस्तमोगुणबहुला उत्पत्ति तमोराजसनाम से प्रसिद्धि प्राप्त करती
है