Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
उत्तमाधममध्यानां पदार्थानामितस्ततः ।
उत्पत्तीनां विभागोऽयं श्रृणु वक्ष्यामि राघव ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
किन्हीं जीवों की शीघ्र मुक्ति होती है और किन््हीं की विलम्ब से होती है, इस पूर्वोक्त
मुक्ति के विभाग में भावभंगिमा से श्रीरामचन्द्रजी की विशेष जिज्ञासा ताड़ कर उसे विस्तारपूर्वक
कहने के लिए श्रीवसिष्ठजी कहते हैं।
वत्स श्रीरामचन्द्रजी, सात्विक, तामस और राजस भेदसे उत्तम, अधम और मध्यम
जीवोपाधिरूप पदार्थो की विविध भुवनो मेँ जो उत्पत्तियाँ पहले कही हैं, उनका यह (आगे
कहा जानेवाला) विभाग है, उसे मैं कहूँगा, आप सुनिए
सर्ग सन्दर्भ
तिरानबेवाँ सर्ग समाप्त चौरानबेवाँ सर्ग उपाधि तथा गुणों की विचित्रता से शीघ्र और विलम्ब से मुक्त होनेवाली बारह प्रकार से भिन्न जीवजातियों का वर्णन ।