Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
ततः कर्मरज्जुभिर्वासनावलिताभिर्बद्धशरीरा भ्रमन्तः प्रोत्पतन्ति च ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर शुभ
ओर अशुभ वासनाओं से युक्त पुण्य-पाप कर्मरूपी रस्सियों से जिनका लिंग शरीर बंधा हे,
ऐसे वे जीव घूमते हुए उत्तम लोको में जाते हैं अथवा नरको में गिरते हैं