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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

पौरुषेण मनः कृत्वा नीरागं विगतज्वरम् । माण्डव्येन जिताः क्लेशाः शूलप्रान्तेऽपितिष्ठता ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

शूल के अग्रभाग में स्थित माण्डव्य ऋषिने अपने पुरूषप्रयत्न से मनको रागरहित और दुःखशून्य बनाकर सम्पूर्ण क्लेशों पर विजय पाई यानी क्लेशों को क्लेशरूपसे नहीं जाना ऋषिमाण्डव्य की कथा महाभारत आदि में प्रसिद्ध है