Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

पौरुषं स्वमवष्टभ्य धैर्यमालम्ब्य शाश्वतम् । यदि तिष्ठत्यगम्योऽसौ दुःखानां तदनिन्दितः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

उसकी स्वाधीनता की, हेतुप्रदर्शनपूर्वक, उपपत्ति करते है । यदि वह अपने पौरूषका आश्रय लेकर और कभी नष्ट न होनेवाले अपने धैर्यका अवलम्बन लेकर खड़ा होता है, तो सम्पूर्ण दुःख आदि उस पर आक्रमण नहीं कर सकते हैं; दुःख आदि के हेतुओं से वह अदूषित रहता हे