Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
चित्तताम्रे शोधिते हि परमार्थसुवर्णताम् ।
गतेऽकृत्रिम आनन्दः किं देहोपलखण्डकैः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
विचाररूप शोधन करने पर चित्त क्या होता है ? यह कहते है ।
चित्तरूपी तबि का शोधन करनेपर जब वह परमार्थरूप सुवर्णताको प्राप्त होता है, तब
निरतिशय आनन्द की उपलब्धि होती हे । यदि कोई कहे तब देह आदिका भी शोधन करना
चाहिए, उससे भी पुरुषार्थ क्यों प्राप्त नहीं होता ? इस पर कहते हैँ । देहरूप पत्थरके टुकड़ों
का शोधन करने से क्या लाभ है ? अर्थात् देह आदिका शोधन वृथा हे