Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
देहादिदेहप्रतिभारूपात्म्यं त्यजता सता ।
विचार्यं प्रतिभासात्म चित्तं चित्तेन वै स्वयम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसका किस प्रकार ज्ञान हो सकता है ? इसका उपाय कहते है ।
स्थूल देह आदिरूप तीन देहो की प्रतिभारूपता का त्याग कर रहे अधिकारी चित्तको ही
प्रतिभासात्मक (प्रातिभासिक) चित्तका स्वयं विचार करना चाहिए