Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

सर्वत्वाद्ब्रह्मणः सर्वं जडं चिन्मयभेव च । अस्मदादिशिलान्तात्म न जडं न च चेतनम् ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार जगत्‌ भी जडाजडरूप विरूद्धस्वभाव होनेसे मायिक ही है, ऐसा कहते है । ब्रह्म सर्वमय है; इस प्रकार सभी जड और सभी चिन्मय ही है । ब्रह्मा से लेकर स्तम्ब (चींटी) पर्यन्त सम्पूर्णं जगत्‌ जड़ाजड़ धर्मशून्य है । युक्तिरूप दृष्टि से देखने पर एकमें उक्त उभयविधता असंभव है, ऐसा बोध होता है सही, पर परमार्थदृष्टि से तो वह धर्मशून्य है । अर्थात्‌ परम तत्त्व मेँ जडत्व ओर चेतनत्वरूप किसी भी धर्म की स्थिति सिद्ध नहीं हो सकती