Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
मनसा भाव्यमानो हि देहतां याति देहकः ।
देहभावनयाऽयुक्तो देहधर्मैर्न बाध्यते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
मन से “में तुच्छ देह हूँ” ऐसी भावना करने पर
नर देहता को (जन्म, मरण आदि धर्मवत्ताको) प्राप्त होता है, और देहभावना से यदि युक्त न
हो, तो जन्म, मरण आदि से पीडित नहीं होता