Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
इन्द्रोऽपि च तदासक्तसमस्तकरणाकुलः ।
न तिष्ठति क्षणमहो तया विरहितः क्वचित् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्रकी भी समस्त इन्द्र्यो उसपर आसक्त थी,
अतः वह बड़ा व्याकुल रहता था, उसके बिना कहीं पर भी एक क्षण नहीं रह सकता था