Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
एतानि दश विद्यन्ते किल यत्र जगन्ति वै ।
तत्रान्यो मम सर्गेण कोऽर्थः कथय भास्कर ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सूर्य, जहाँ पर ये दस ब्रह्माण्ड विद्यमान हैं, वहाँ पर मेरी सृष्टि से
और क्या प्रयोजन सिद्ध होनेवाला है, इसको आप कहिए