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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

सर्गैरथेन्दुपुत्राणां तोषमेषि जगत्प्रभो । तदेते तोषयिष्यन्ति तं त्वां सर्गात्सुरेश्वर ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे जगत्प्रभो, इन ऐन्दवों की सृष्टि से अपने पुत्र, पौत्र आदि सम्पत्ति की वृद्धि देखने से यदि आप सन्तोष को प्राप्त हो, तो हे देवाधिदेव ये ऐन्दव ब्राह्मण भविष्यमें भी सृष्टि से सन्तुष्ट होनेवाले आपको सन्तुष्ट करेंगे