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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verses 12–13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 12,13

संस्कृत श्लोक

यथैव कर्मकरणे कामना नास्ति धीमताम् । तथैव कर्मत्यागे कामना नास्ति धीमताम् ॥ १२ ॥ अतः सुषुप्तोपमया धिया निष्कामया तया । सुषुप्तबुद्धसमया कुरु कार्यं यथागतम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे आत्मज्ञानियों की अप्राप्त कर्म करने में कामना नहीं होती है वैसे ही प्राप्त कर्म के त्यागमें भी कामना नहीं होती, क्योकि कामनात्याग का कोई हेतु देखने में नहीं आता, इसलिए परमार्थरूप से कुछ न करनेके कारण सुषुप्ततुल्य और प्रतीतिरूप से तो करने के कारण स्वप्नतुल्य निष्काम बुद्धि से प्राप्त हुए कार्य को कीजिये