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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

एष ते कथितः सर्गो दिशानामलसंभव । ब्रह्मणां संभवो व्योम्नि यथेच्छसि तथा कुरु ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

हे ब्रह्मन्‌, यह दस ब्रह्माओं की सृष्टि मैंने आपसे कही और आकाश में दस ब्रह्माओं की उत्पत्ति भी कही, अब आप जो करना चाहते हैं, उसे कीजिये, क्योंकि उनकी सृष्टियों के रहते भी आपकी सृष्टि से कोई विरोध नहीं है