Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तेषामेकतमस्याहमयमाकाशमन्दिरे ।
भानुर्भुवि विभो कालकलाकर्मणि योजितः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इतने ग्रन्थ से कथमिदं जातम्“ (कैसे यह उत्पन्न हुआ) इस प्रश्न का उत्तर देकर "कर्त्वम्
(तुम कौन हो) इस प्रश्न का उत्तर देते हैं।
हे ब्रह्मन्, उन एेन्दव सर्गो से एक ब्रह्माण्ड छिद्रभूत आकाशरूप मन्दिर में भूलोक में
(तीनों लोकों में) कालविभागरूप कर्ममें नियुक्त मैं एक सूर्य हूँ