Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, Verses 48–49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, verses 48–49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 48 , 49
संस्कृत श्लोक
अयं संवत्सरो यात इदं परिणतं युगम् ।
सृष्टेरयमसौ कालः स्वयं संहरणस्य च ॥ ४८ ॥
अयमेव गतः कल्पो ब्राह्मी रात्रिरियं तता ।
अयमात्मनि तिष्ठामि पूर्णात्मा परमेश्वरः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह
संवत्सर बीता, यह युग भी कूच कर गया, यह सृष्टि का समय है, यह संहारका समय है, यह कल्प
बीत चुका है, यह ब्रह्मा की रात्रि फैली है, मैं आत्मा में यानी स्वस्वरूप में स्थित हूँ, पूर्णात्मा हूँ,
परमेश्वर हूँ