Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, Verses 27–29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, verses 27–29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 27-29
संस्कृत श्लोक
किं महत्त्वं किमैश्वर्यं किं महाविभवं शुभम् ।
किं तदेतज्जनैश्वर्यं सामन्तो हि महेश्वर ॥ २७ ॥
सामन्तसंपत्किंनाम राजानो हि महेश्वराः ।
का नाम संपद्भूपानां सम्राडिह महेश्वरः ॥ २८ ॥
किं नाम तन्महेन्द्रत्वं यन्मुहूर्तं प्रजापतेः ।
विनश्यति न यत्कल्पे किं स्यात्तदिह शोभनम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
क्या महत्त्व है, क्या एश्वर्य, क्या अत्यन्त शुभ महावैभव
है ? क्या इन लोगों का एेश्वर्य भी कोई रेश्वर्य है ? क्योकि सर्वसाधारण गृहस्थो और ग्राम
के नायको की अपेक्षा सामन्त अधिक एेश्वर्यवान् है । सामन्त की सम्पत्ति कौनसी सम्पत्ति
हैं ? क्योकि राजा लोग उनके एेश्वर्य से कहीं अधिक एेश्वर्य-सम्पन्न हैं ? राजाओं की सम्पत्ति
भी कौन सम्पत्ति है ? क्योंकि उनकी अपेक्षा सम्राट् करीं अधिक एेश्वर्यवान् है । वह महेन्द्रत्व
भी क्या वस्तु है, जो ब्रह्माके मूहूर्तमें नष्ट हो जाता है । जो वस्तु प्रलयमें नष्ट नहीं होती है,
ऐसी कोन शोभन वस्तु यहाँ है