Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, Verses 1–2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, verses 1–2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 1,2

संस्कृत श्लोक

श्रीभानुरुवाच । कल्पनाम्नि महादेव ह्यस्तने दिवसे तव । तले कैलासशैलस्य जम्बूद्वीपैककोणके ॥ १ ॥ सुवर्णजटनाम्ना यस्त्वत्पुत्रैर्जनितप्रजैः । मण्डलं कल्पितं श्रीमदनल्पसुखसुन्दरम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

सूर्य ने कहा : हे देवाधिदेव ब्रह्माजी, कल्पनामक आपके अतीत दिनमें जम्बूद्वीप के एक कोने में स्थित कैलास पर्वत के निम्नप्रदेश में सुवर्णजटनाम से प्रसिद्ध जो प्रदेश है, वहाँ पर आपके पुत्रोने, जिनकी अनेक सन्ताने उत्पन्न हो गई थीं, अपनी सन्तति के विकास के लिए बड़े सुन्दर प्रचुर सुख से पूर्ण मण्डल की कल्पना की

सर्ग सन्दर्भ

पचासीवाँ सर्ग समाप्त छियासीवाँ सर्ग स्त्रीसहित इन्दु की तपस्या से दस एेन्दवोँ की उत्पत्ति ओर उनमें सबसे ज्येष्ठ के उपदेश से उनकी ब्रह्माहंभावना का वर्णन |