Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verses 2–3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, verses 2–3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 2,3
संस्कृत श्लोक
पुरा मया हि भगवान्पृष्टः कमलसंभवः ।
इमे कथमुपायान्ति ब्रह्मन्सर्गगणा इति ॥ २ ॥
तदुपाश्रुत्य भगवान्ब्रह्मा लोकपितामहः ।
ऐन्दवाख्यानसहितं मामुवाच बृहद्वचः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले मैंने भगवान् ब्रह्मा से पूछा था, हे ब्रह्मन्, ये सब ब्रह्माण्ड कैसे उत्पन्न होते
हैं ? मेरे प्रश्नों को सुनकर “तुमने जो पूछा उसे मैं तुमसे कहूँगा ।* - ऐसी प्रतिज्ञा कर
लोकपितामह ब्रह्मा ने एेन्दवोपाख्यान से युक्त ये गम्भीरार्थक वचन मुझसे कहे