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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

प्लाविन्यो वीचयो वारिण्यन्यानन्याः स्थिता यथा । वर्तमाना अपि परे सृष्टयः संस्थितास्तथा ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे जलराशि में उठ रही (वर्तमान), अतीत ओर अनागत तरंगे भिन्न-अभिन्नरूपसे स्थित हैं, वैसे ही परब्रह्म मेँ वर्तमान अतीत ओर अनागत सृष्टियाँ अन्य अनन्य रूप से स्थित हैं