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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

योऽयं चित्तस्य चिद्भागः सैषा सर्वार्थबीजता । यश्चास्य जडभागश्च तज्जगत्सोऽङ्ग संभ्रमः ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त के दो अंश है-उनमे एक चैतन्य अंश की प्रधानता से दष्टतारूप सर्वकल्पनाओं की बीजभूत अहन्ता है ओर दूसरा जड़ांश की प्रधानता से दृश्यभ्रान्तिरूपता है, ऐसा कहते हैं । चित्त का जो चैतन्य अंश है, वही सम्पूर्ण पदार्थो का बीज है ओर जो इसका जड भाग है, वह जगत्‌ है और वही भ्रम है