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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 37

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

चित्तं साध्यं पालनीयं विचार्यं कार्यमार्यवत् । आहार्यं व्यवहार्यं च संचार्यं धार्यमादरात् ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

लौकिक और शास्त्रीय जितने साध्य, पालनीय आदि पदार्थ है, उनके रूप से चित्त ही विकास को प्राप्त हुआ है, अन्य कोड पदार्थ नहीं है, ऐसा कहते है । चित्त ही साध्य, पालनीय, विचारणीय, आर्यवत्‌ करणीय, आहार्य, व्यवहार्य, संचार्य ओर आदरपूर्वक धार्य सब कुछ है ([-))