Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
वाच्यवाचकसंबोधो विना द्वैतं न सिद्ध्यति ।
नच द्वैतं संभवति मौनं वापादयत्यलम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
द्वित भले ही न हो, पर विवाद का असम्भव कैसे हो सकता है, इसपर कहते हैं।
द्वैत के बिना वाच्यवाचक का परस्पर बोध नहीं हो सकता।
शंका - यदि द्वैत के बिना परस्पर वाच्यवाचकसम्बोधरूप विवाद नहीं हो सकता, तो द्वैत
ही हो।
समाधान - द्वैत का वास्तव में सम्भव ही नहीं है, क्योकि वह वेतालकल्पना के समान
कल्पित है, इसलिए मौन ही सिद्ध होता है