Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
विवदन्ते ह्यसंबुद्धाः स्वविकल्पविजृम्भितैः ।
उपदेशादयं वादो ज्ञाते द्वैतं न विद्यते ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन लोगों को तत्त्व
का परिज्ञान नहीं हुआ है, ऐसे अज्ञ पुरुष अपने विकल्पों से उत्पन्न हुए तर्को से अद्वैत के
विषय में विवाद करते हैं, उपदेश से तत्त्ववस्तु के ज्ञात होने पर द्वैत नहीं रहता, यह सम्पूर्ण
भेदवाद जबतक वेदान्ततत्त्वका उपदेश नहीं होता, तभीतक रहता है