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Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 83

बयासीवाँ सर्ग समाप्त तिरासीवाँ सर्ग समाधि से चिरकाल तक व्युत्थित नहीं हुई वह कर्कटी किरातमण्डल में कन्दरादेवीरूप से प्रतिष्ठित हुई-यह वर्णन |

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  1. Verse 1श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, उस किरातमण्डल में जो-जो राजा होते हैं, उन सबक…
  2. Verse 2यह योगसिद्ध राक्षसी वहाँ पर जो बड़े-बड़े उत्पात, पिशाच आदिका भय, ओर रोग उत्पन्न होते हैं,…
  3. Verses 3–7बहुत वर्षो के बाद ध्यान से विरत हुई वह किरातमण्डल मेँ आकर इकडे किये हुए समस्त वध्य जन्तुओ…
  4. Verse 8जो अधम राजा कन्दरा देवीकी प्रतिष्ठा नहीं करता, अनेक उपद्रव आदि उसकी प्रजाको यत्नपूर्वक नष…
  5. Verse 9उसके पूजन से मनुष्य उत्पात, रोग आदि की शान्तिरूप सम्पूर्ण फलको प्राप्त होते हैं और जो पूज…
  6. Verse 10वध्य जनों की बलि से उस देवीकी पूजा की जाती है, वह प्रतिमा आज भी वहाँ पर स्थित है, अन्यत्र…
  7. Verse 11सम्पूर्ण लोगों को बालक, बछड़े, धन, धान्य आदि वैभव और सम्पत्तियाँ देनेवाली, सम्पूर्ण वध्यज…