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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 83, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 83, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । किरातमण्डले तस्मिन्ये भवन्ति महीभृतः । तैस्तैः सह परा मैत्री तस्याः समभिजायते ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, उस किरातमण्डल में जो-जो राजा होते हैं, उन सबके साथ उस राक्षसी की अत्यन्त मत्री रहती है

सर्ग सन्दर्भ

बयासीवाँ सर्ग समाप्त तिरासीवाँ सर्ग समाधि से चिरकाल तक व्युत्थित नहीं हुई वह कर्कटी किरातमण्डल में कन्दरादेवीरूप से प्रतिष्ठित हुई-यह वर्णन |