Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verses 26–27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, verses 26–27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 26,27
संस्कृत श्लोक
सोऽयं प्रगृह्यतां तेन सर्वं हृदयशूलनम् ।
शममेष्यति लोकेऽस्मात्का कथा मत्कृते भ्रमे ॥ २६ ॥
विततैवास्मि हिंसायां यत्पुरा हिंसितं मया ।
जनस्य हृदयं तेन नाड्यो वैधुर्यमागताः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस मन्त्र को तुम लो,
उससे लोक में सम्पूर्ण हृदयशूल शान्त हो जायेंगे, मेरे द्वारा की गई पीडा की तो बात ही क्या
है ? मैंने जगत् में पहले खूब हिंसा की । मेने पहले खून चूसने से लोगों के हृदय को खूनरहित
कर दिया । उससे लोगों की नाडियाँ खून से रहित हो गई हैं