Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सोऽणुः सर्वं न किंचिच्च सोऽहं नाहं स एव च ।
सर्वशक्यात्मनोऽस्यैव प्रतिभैकात्र कारणम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
"कः सर्वा न च किंचिच्च' इत्यादि प्रश्न का उत्तर कहते हैं।
वही अणु सब हे और कुछ भी नहीं हे । "कोऽहं नाहं च किं भवेत्“ इसका समाधान करते
हैं-'सो5हं” इत्यादि से । वही मैं हूँ और कुछ भी नहीं हू । अहंकार के हटने के कारण वह मैं हूँ
और तद्रूप से मैं नहीं हूँ, इस प्रकार वास्तव और अवास्तव विचित्रता में क्या कारण है, इस पर
कहते हैं । सर्वशक्तिस्वरूप इस अणु की ही प्रतिभा एकमात्र इसमें कारण है, उसकी
भ्रान्तिप्रतिभाशक्ति अवास्तविक रूपकी स्फूर्ति में और वास्तवप्रतिभाशक्ति वास्तवरूप की
अभिव्यक्तिमें कारण है, यह अर्थ है