Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 62
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
न च गच्छति दृश्यत्वं द्रष्टाह्यसदवास्तवम् ।
आत्मन्येव न यत्किंचित्तत्तामेति कथं परः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
सत् ही असत् के समान स्थित है, ऐसा जो ऊपर कहा था, उसका उपपादन करते है ।
द्रष्टा असत् अतएव अवास्तव दुश्यत्व को प्राप्त ही नहीं होता ।
शंका : क्यो दृश्यत्व को प्राप्त नहीं होता ?
समाधान : जो वस्तु आत्मा में तनिक भी नहीं है, तत्ताको परमात्मा कैसे प्राप्त होगा,
कारण कि सत् असद्रूप नहीं हो सकता