Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 58
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 58 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
सर्वं समसमाभासमिदमाकाशकोशकम् ।
जगत्तयोपशब्दं च विद्ध्यनाद्यं निशाचरि ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
शकरा : यदि ऐसा है तो असरत् दृश्य का खण्डन वेदान्तो में किसलिए किया जाता है ?
समाधान : व्यावहारिक यौक्तिक दृष्टि से वेदान्तो में दश्यका खण्डन किया गया है,
परमार्थदृष्टि से नहीं किया गया हे ।
परमार्थ दृष्टि कैसी है, यह प्रश्न होने पर उसे दशाति हैं।
हे राक्षसी, ब्रह्म से भासित होनेवाला यह सब दृश्यादि चिदाकाशकोशस्वरूप ही है, इसका
केवल जगत्रूप से शब्दतः व्यवहार हुआ है, ऐसा तुम जानो