Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 57
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
जगन्न किंचित्क्रियते सर्वदैव न केनचित् ।
विलीयते च नो किंचिन्मानुष्याद्दृश्यखण्डनम् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका क्रिया और भोग से सम्बन्ध क्यो नहीं है 2 इस पर कहते हैं।
जगत् सदा हि किसीसे कुछ नहीं बनाया जाता है और न लीन होता है, क्योंकि क्रिया का
विषय जगत् अत्यन्त असत् है