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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 46

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

सर्वावयविसारत्वात्सहस्रकरलोचनः । परमाणुरसावेव नित्यानवयवोदयः ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसके अवयव उत्पन्न ही नहीं हुए, ऐसा कौन अणु सैंकड़ों हाथ, सिर, लोचन आदि से युक्त है ? इस प्रश्न का उत्तर देतेहै। सदा अवयवो के बिना उदित हुआ भी यह परमाणु ही सम्पूर्णं अवयवियों का यानी उद्भिज्ज, स्वेदज, अण्डज ओर जरायुज इन चार प्रकार के सम्पूर्ण प्राणियों का सार यानी आत्मा होने से सैकड़ों, हाथ, सिर, लोचन आदि से युक्त है