Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
सत्यं चिन्मयमेवेदं जगदित्येव विद्ध्यलम् ।
वसन्तरसमेव त्वं विद्धि पल्लवगुल्मकम् ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार चित् ओर जगत का तत्वतः भेद नहीं है, ऐसा कहते हैं।
इस जगत् को सत्य चिन्मय ही आप जानिए, जैसे कि पल्लव, निकुंज आदि वसन्तरसही
हैं, उससे अतिरिक्त नहीं है