Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
यदि सूर्यादिकं सर्वं जगदेकं जडं भवेत् ।
ततः किमात्मकं रूपं प्रकाशः स्यात्क्व वाथ किम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरी बात यह भी है कि यदि उसकी असत्ता हो जाती, तो जगत् अन्धा हो जाता, ऐसा
कहते हैं।
यदि सूर्य आदि सम्पूर्ण जगत केवल मात्र जड हो जायेगा, तो रूप किमात्मक होगा और
प्रकाश कहाँ होगा और क्या होगा ?