Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
प्रकटोऽनेन दीपेन प्रकाशोऽनुभवात्मना ।
स्वसत्तानाशपूर्वो हि विनानेन भवेत्ततः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
कौन अणु प्रकाश और तमका दीपक है, इस प्रश्न का उत्तर कहते है ।
पूर्वोक्त अनुभवरूप परमात्मा दीपक है, क्योंकि आत्मा के सिवा किसीमें भी स्वतन्त्रता से
प्रकाश करनेका सामर्थ्य नहीं है ओर कभी भी आत्मा का अभाव नहीं होता । उसका अभाव है
कहना “मेँ नहीं हूँ” कहने के बराबर है । प्रकाश ओर अन्धकार दोनों का प्रकाशक है, यदि इस
आत्मदीपकके बिना ही प्रकाश अथवा अन्य (तम) होगा, तो उसकी सत्ता का लोप हो जायेगा,
उससे वह असत् ही हो जायेगा